पहलगाम में आतंकवादियों ने पर्यटन हेतु आए हिंदुओं की उनका धर्म पूछकर हत्या की। इसलिए भारत के सम्मुख उपस्थित चुनौतियां देखीं, तो ‘सनातन धर्मियों का अस्तित्व और सनातन धर्म का संरक्षण’ अत्यंत महत्त्वपूर्ण है। इसलिए सनातन धर्म को पुनर्वैभव प्रदान करने हेतु ‘शंखनाद महोत्सव’ का आयोजन किया गया है। यह महोत्सव धर्मभक्तों को आध्यात्मिक बल देगा, एक नवचेतना और ऊर्जा प्रदान करेगा।
जिस प्रकार प्रत्येक हिन्दू मंदिर में ध्वज फहराया जाता है, उसी प्रकार हिन्दू राष्ट्र से संबंधित सनातन धर्मध्वज भी महोत्सव के दौरान फहराया गया। यह ध्वज राजनीतिक या संवैधानिक प्रकृति का नहीं है; यह आध्यात्मिक ध्वज है। यह धर्मध्वज (धर्म का ध्वज) विश्वभर के हिन्दुओं को ‘हिन्दू राष्ट्र’ की स्थापना के अभियान की याद दिलाता है।
इसी तारतम्य में सनातन धर्म को हमेश अग्रिन करने और सनातन धर्म की रक्षा के लिए लालायित रहने वाले नायकों को पुरस्कृत कर इस कार्य को अनवरत सुचारू रखने की प्रेरणा देता है।
*”सनातन राष्ट्र शंखनाद महोत्सव” में प्रबल प्रताप सिंह जूदेव जी को “सनातन धर्मश्री पुरस्कार” से सम्मानित किया जाएगा*
गोवा स्थित परिपूर्ण अध्यात्मशास्त्र एवं साधना के प्रचार-प्रसार के लिए कार्यरत सनातन संस्था द्वारा संस्था के प्रमुख, पूज्य गुरूदेव डॉ. जयंत आठवलेजीं के जन्मोत्सव पर 18 से 19 मई 2025 को “सनातन राष्ट्र शंखनाद महोत्सव” में छत्तीसगढ़ के प्रबल प्रताप सिंह जूदेव जी को “सनातन धर्मश्री पुरस्कार” से सम्मानित किया गया l
यह कार्यक्रम संस्था के रजत महोत्सव (25 वर्ष पूर्ण होने) के उपलक्ष्य में आयोजित किया गया l
इस त्रि-दिवसीय महोत्सव का आयोजन गोवा में किया गया है, जिसमें धर्म रक्षा, राष्ट्र सेवा और सनातन मूल्यों की पुनर्स्थापना को लेकर विविध कार्यक्रमों का आयोजन हुआ l
अपने पिताजी श्रद्धेय दिलीप सिंह जूदेव जी के घर वापसी अभियान को आगे बढ़ाते हुए प्रबल प्रताप सिंह जूदेव ने हजारों लोगों को सनातन धर्म में पुनः प्रतिष्ठित किया है। धर्म जागरण और राष्ट्र सेवा के क्षेत्र में उनके अद्वितीय योगदान को मान्यता देते हुए उन्हें यह सम्मान प्रदान किया ।
कार्यक्रम में विष्णु शंकर जैन जी, सुरेश चावनके जी, टायगर राजा सिंह जी, उदय महुरकर जैसे गणमान्य एवं धर्म एवं राष्ट्र उत्थान के लिए समर्पित भाव से कार्य करने वाले ऐसे कई महाअनुभावों को भी सम्मानित किया गया l













