कचरे के ढेर में है शमशान घाट

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चिर निंद्रा में है जन प्रतिनिधि , और प्रशासनिक अधिकारी

मुक्तिधाम नाम से ही विदित हो जाता है कि इस जगह से पार्थिव शरीर को दुनिया से मुक्त किया जाता है , मरणोपरांत सभी अपने प्रियजन को मुक्ति धाम लेकर आते है ताकी अंतिम विदाई पूरे विधि विधान से किया जा सके ।

मगर कोटा के फ़िरंगी पारा का शमशान घाट , जिसे देख कर आपका आक्रोशित होना लाज़मी है , यहाँ न ही बैठने की व्यवस्था है ना ही पानी की कोई व्यवस्था , आलम ये है कि चंद मिनट भी यहाँ गुजारना दूभर है ।

दिल दुखता है जब अपने प्रिय जन के मठ को लोग कचरे के ढेर में तब्दील होते देखते है , नगर पंचायत पूरा कचरा इकट्ठा कर फ़िरंगी पारा के शमशान घाट में लाकर डाल रही है जिससे यहाँ बने मठ कचरे के ढेर में बदलते नज़र आ रहे है।

देखना यह होगा कि जन प्रतिनिधि , और जिम्मेदार अधिकारी कुम्भकर्णीय निंद्रा से जाग कर कब इस मुक्ति धाम के जीर्णोद्धार के विषय मे सोचेंगे ।।