कब किसकी मौत हो , तो मुआवजा का खेल हो शुरू , कुछ लोग इसी सोच में डूबे हैं दिन रात

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बीमारी से मौत फिर भी मिल रहा मुवावजा, आखिर कब लगेगी गोरख धंधे में विराम।

 

कोटा विकास खण्ड के आदिवासी सुदूर वनांचल क्षेत्र में कमीशन खोरी में चल रहा अवैध गोरखधंधा, गोरख धंधा ऐसा की सुनकर आपके पैरो तले जमी खिसक जाएगी ,आपने कभी नहीं सुना होगा की तबियत खराब व हार्ट अटैक व बीमारियों से मरने वालों को शासन मुवावजा राशी देती हो लेकिन, ऐसा ही
मामला कोटा विकास खंड आदिवासी बहुल क्षेत्र से सामने आया है। ये कोटा बेलगहना क्षेत्र सहित आस पास जंगली क्षेत्र में निवासरथ भोले भाले आदिवासियों द्वारा आज भी किसी बीमारी को पुरानी रुढ़िवादी के रूप में देखा जा सकता है,ऐसा हम इसलिए कह रहे हैं कि बीमारी का ईलाज कराने के वजाए आज भी झाड़ फूक पर विश्वास करते है।जिससे धीरे धीरे ईलाज के अभाव में मौत भी हो जाती है, लेकिन मौत के बाद अगर पैसे मिल जाए तो गरीब परिवार के लिए वरदान साबित हो जाता है, ऐसे कार्य के लिए बेलगहना में चर्चा का विषय बना हुआ है।आपको बता दें ये गोरख धंधा बेलगहना क्षेत्र में विगत 4 साल से चलते आ रहा है, सूत्रों की माने तो इस कार्य के लिए मौके पर पहुंच कर मृत व्यक्ति के परिजनों को तत्काल 20 से 30 हजार रुपए दाहसंस्कार के लिए दिया जाता है,जिसके बाद मृत व्यक्ति की फ़ोटो व आधार कार्ड को अपने पास रख लेते हैं, वहीं सूत्रों की माने तो दलालों द्वारा डॉक्टर को फोन कर इसकी जानकारी देते हैं की मामला को बनाना है, मामले को बनाने के लिए पोस्टमार्टम करने वाले डॉक्टर को भी इसके लिए मोटी रकम भी दिया जाता है। बहरहाल मामले को गम्भीरता से लेते हुए शासन प्रशासन इसके लिए जाँच टीम बना कर जाँच करानी चाहिए जिससे काले कारनामे से पर्दा उठ सके।

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