जानिए बोरे और बासी में क्या अंतर है , छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री ने क्यों कहा आज के दिन इसे खाने को , फायदे जान कर हो जाएंगे हैरान

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  • रात को खाने के बाद बचे हुए चावल को पानी मे डुबाकर सुबह खाया जाता है , उसे कहते हैं बासी , जबकि रात में चावल बना कर उसे ठंडा करने के बाद पानी डाल कर खाया जाता है उसे कहते हैं बोर , ये तो हो गया बोरे और बसी में अंतर ।

अब जानिए मुख्यमंत्री ने आज ही के दिन मजदूर दिवस पर बोरे बासी खाने क्यों की अपील , यही नही उन्होंने देश विदेश में बसे सभी छत्तीसगढ़ वासियों को मजदूर दिवस आज के दिन बोरे बासी खाने का किया आग्रह , जिससे श्रम को मिलेगा सम्मान , ऐसे में जानना ज़रूरी है की बोरे बासी होता क्या है ।

दरअसल, कुछ लोग बोरे और बासी को एक ही समझते हैं, लेकिन ऐसा नहीं है। बोरे और बासी में बहुत अंतर है। बता दें कि रात को खाना खाने के बाद बचे हुए चावल को पानी में डूबाकर रख दिया जाता है और उसे सुबह में खाया जाता है, उसे बासी कहते हैं। जबकि रात में चावल बनाकर उसे ठंडा करने के बाद पानी में डालकर खाते हैं तो उसे बोरे कहते हैं।

बोरे-बासी खाने के फायदे
छत्तीसगढ़िया बोरे और बासी खाने से कई फायदे होते हैं। कहा जाता है कि इसे खाने से खूब प्यास लगती है और ज्यादा पानी पीने से डि-हाइड्रेशन जैसी समस्या नहीं होती है। बताया जाता है कि इसे खाने के बाद यह शरीर के ताप को नियंत्रित करता है। जिस वजह से पड़ने वाली गर्मी और लू का प्रभाव नहीं पड़ता है। इसे खाने से नींद भी अच्छी आती है।

बोरे और बासी पर शोध हो चुका है
बता दें कि बोरे और बासी पर शोध भी हो चुका है। अमेरिका में हुए शोध में पाया गया कि इसे खाने से डि-हाइड्रेशन और बीपी कंट्रोल में रहता है। इसमें कई तरह के पोषक तत्व भी पाए जाते हैं, जिससे इसे खाने से हमारी थकान दूर हो जाती है। छत्तीसगढ़ के अलावा इस व्यंजन को दक्षिण भारत के कई राज्यों में खाया जाता है।

सीएम बघेल ने की अपील
यही कारण है कि छत्तीसगढ़ के सीएम भूपेश बघेल ने बोरे और बासी की विशेषता ट्ववीट करते हुए बताया है कि इसे गर्मी के दिनों में खाने से शरीर ठंडा रहता है और पाचन शक्ति मजबूत होती है। सीएम बघेल ने लोगों से आग्रह किया कि हम सभी मजूदर दिवस के दिन यानी आज बोरे और बासी को खाएं और अपनी संस्कृति और विरासत पर गर्व महसूस करें।