वह दर्दनाक 96 घंटे जिसमें राहुल के मन में ना जाने क्या क्या विचार आए होंगे

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किसी के जीवन में अगर यह 96 घंटे आए जहां सभी लोग तो हैं पर दिखाई नहीं दे रहे परिजन तो है पर सुनाई नहीं दे रहे हैं उसके परिजन उसे छूना चाहते हैं पर नामुमकिन सा लग रहा है  वह शख्स परिवार वालों से गले मिलना चाहता है पर बेबस है

काल की गोद में बैठा वह बच्चा राहुल जिसका 96 घंटा अंधकार में बीत रहा है और वह कुछ नहीं कर पा रहा है बड़ी बहादुरी से काल से लड़ाई करता यह बच्चा एक मिसाल है उन लोगों के लिए जो जीवन के संघर्षों से हार मान लेते हैं भले ही वह 96 घंटे से अकेला है अंधकार की गोद में अनचाहे विचार उसके दिमाग में आते होंगे पर वह बच्चा राहुल बड़ी बहादुरी से इस कठिन समय पर विजय प्राप्त करता जा रहा है

ऑपरेशन राहुल का अंतिम दौर शुरू हो गया है बस कुछ ही फिट दूर है रेस्क्यू टीम राहुल से

रेस्क्यू टीम बहुत ही तेजी से बचाव कार्य में जुटी है बीच-बीच में बड़े चट्टानों के आने से थोड़ी दिक्कतों का सामना जरूर करना पड़ रहा है पर बहुत ही सावधानी से धीरे-धीरे उन चट्टानों को तोड़ा जा रहा है अब वह पल ज्यादा दूर नहीं जब छत्तीसगढ़ का लाडला राहुल एक बार फिर से अपने घर के आंगन में अपने बचपन का लुफ्त उठाते नजर आएगा

बच्चे को तत्काल सहायता मुहैया कराने के लिए मौके पर सभी जरूरी इंतजाम
बयान में कहा गया है कि स्वास्थ्य कर्मियों की एक टीम ने बच्चे को तत्काल सहायता मुहैया कराने के लिए मौके पर सभी जरूरी इंतजाम किए हैं जबकि बिलापुर के अपोलो अस्पताल में उसे स्थानांतरित करने के लिए सभी सुविधाओं के साथ एक एम्बुलेंस भी तैयार रखी गई है। विज्ञप्ति के अनुसार बोरवेल के अंदर कुछ पानी था जहां बच्चा फंसा था। एनडीआरएफ के जवान इसे निकालने के लिए लगातार प्रयास कर रहे हैं। क्षेत्र के ग्रामीणों को अपने बोरवेल चालू करने के लिए कहा गया था, जबकि भूजल स्तर को कम करने के लिए पास के दो बांध से भी पानी छोड़ा जा रहा है। इस बीच, बच्चे को सुरक्षित निकाले जाने के लिए सोशल मीडिया पर दुआएं की जा रही हैं।