कोटा।
छत्तीसगढ़ की जनजातीय संस्कृति में बैगा जनजाति का विशेष महत्व है। यह समुदाय राज्य की विशेष पिछड़ी जनजातियों की सूची में शामिल है, जिसके कारण इन्हें शासन की ओर से कई तरह की योजनाओं का लाभ दिया जाता है। इन्हीं योजनाओं में प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना भी शामिल है, जिसका उद्देश्य महिलाओं को धुएं से मुक्ति दिलाना और सुरक्षित रसोई का वातावरण उपलब्ध कराना है।
इस योजना से बैगा परिवारों को बड़ा सहारा मिला। पहले जहां महिलाएँ जंगल से लकड़ी काटकर चूल्हे पर खाना बनाने को मजबूर थीं, वहीं उज्ज्वला योजना के बाद उन्हें गैस सिलेंडर और चूल्हा मिला। इससे उनका जीवन आसान हुआ और जंगल पर निर्भरता भी कुछ हद तक कम हुई।
लेकिन इन सीधे-सादे लोगों की इसी योजना को कुछ स्वार्थी तत्वों ने अपना शिकार बना लिया। मामला कोटा जनपद पंचायत के ग्राम आमामुड़ा का है, जहां बैगा समुदाय निवासरत है। जानकारी के अनुसार, बेलगहना गैस एजेंसी से जुड़े कुछ कर्मचारी गांव पहुंचे और उन्होंने बैगा परिवारों को तरह-तरह के बहाने बनाकर गुमराह किया।
किसी से कहा गया कि आप लोग सिलेंडर का सही उपयोग नहीं कर रहे हैं, इससे शासन की अन्य योजनाओं का लाभ भी बंद हो सकता है। वहीं कुछ लोगों को यह कहकर फुसलाया गया कि सिलेंडर को रिफिल कराने के बाद वापस कर दिया जाएगा। इन झूठे दावों और धमकियों के जरिए एजेंसी कर्मचारी लगभग पंद्रह बैगा परिवारों के गैस सिलेंडर अपने साथ ले गए।
बैगा ग्रामीणों का कहना है कि चार से पाँच महीने बीत जाने के बाद भी अब तक उनके सिलेंडर वापस नहीं किए गए हैं। उन्होंने पत्रकारों से चर्चा में अपनी समस्या साझा करते हुए बताया कि बरसात के मौसम में सूखी लकड़ी मिलना बेहद कठिन हो जाता है। नतीजतन उन्हें भोजन बनाने में भारी परेशानी उठानी पड़ रही है।
गांव की महिलाओं ने बताया कि उज्ज्वला योजना से मिली राहत अब फिर से छिन गई है। बच्चे और बुजुर्ग धुएं वाले चूल्हों से जूझ रहे हैं। बरसात में गीली लकड़ी जलाना मुश्किल हो जाता है और कई बार खाना बनाने में पूरा दिन लग जाता है।
ग्रामीणों का आरोप है कि गैस एजेंसी का कर्मचारी अब उनकी बात तक नहीं सुनता। सिलेंडर लौटाने के नाम पर सिर्फ झूठे आश्वासन दिए जाते हैं।
बैगा समुदाय के लोग शासन से मांग कर रहे हैं कि इस मामले की उच्च स्तर पर जांच की जाए और दोषियों पर कड़ी कार्रवाई हो। साथ ही उनके सिलेंडर तत्काल वापस दिलाए जाएं ताकि वे फिर से उज्ज्वला योजना का सही लाभ ले सकें।
यह घटना न केवल एक जनजाति के साथ हुए अन्याय को दर्शाती है बल्कि यह भी बताती है कि कैसे सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन में कुछ लोग भ्रष्टाचार और धोखाधड़ी के जरिये गरीब परिवारों को ठग रहे हैं।
जरूरत है कि संबंधित अधिकारी इस प्रकरण को गंभीरता से लें और सुनिश्चित करें कि उज्ज्वला योजना जैसी महत्वपूर्ण योजना का लाभ वास्तविक पात्रों तक निर्बाध रूप से पहुंचे।













